Friday, 6 May 2011

क्षणिका

एयर कन्डीशनर की
थोड़ी सी हवा चुरा के रख दी है
मैंने
तुम्हारी पसंदीदा किताबों में
जब
ज्येष्ठ की दुपहरी में
बत्ती गुल हो जाएगी
और
झल्ला कर खोलोगे
तुम किताब
तो तुम्हे ठंडी हवा आएगी :)
-कवयित्री  लीना मल्होत्रा

4 comments:

गीता पंडित said...

आपके ब्लॉग पर आना
अच्छा लगा सिस..


"कम शब्दों में नेह की पाती
भर-भर नेह नयन में लाती|"


सस्नेह
गीता पंडित

संजय भास्कर said...

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

त्रिपुरारि कुमार शर्मा said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Dinesh Mishra said...

बहुत खूब .......!!