मैं उसे कभी ट्रेन तक छोड़ने नही जाती
ट्रेन की आवाज़ मेरी धडकन में बस जाती है
उसके बाद जब तक वह लौट नही आता
मेरा दिल ट्रेन की गति सा चलता है और धडकता है छुक छुक
मैं बिना उसके साथ गए एक सफर में शामिल हो जाती हूँ
रात सोते समय भी मेरे बिस्तर पर धूप उतर आती है
और भागते हुए पेड़ मेरे जीवन की स्थिरता को तोड़ते रहते हैं
तब
सड़कों के किनारे खाली खेतों में वीरान पड़े मंदिरों की तरह मैं अकेली हो जाती हूँ
इसलिए
जब भी वह शहर से दूर जाता है
मैं उसे स्टेशन के बाहर से छोड़ कर चली आती हूँ
और कई कई दिन तक मुझे लगता है
बस वह सब्जी लेने गया है
या हजामत बनवाने
बस आता ही होगा
भ्रम पालने में वैसे भी हम मनुष्यों का कोई सानी नही
ट्रेन की आवाज़ मेरी धडकन में बस जाती है
उसके बाद जब तक वह लौट नही आता
मेरा दिल ट्रेन की गति सा चलता है और धडकता है छुक छुक
मैं बिना उसके साथ गए एक सफर में शामिल हो जाती हूँ
रात सोते समय भी मेरे बिस्तर पर धूप उतर आती है
और भागते हुए पेड़ मेरे जीवन की स्थिरता को तोड़ते रहते हैं
तब
सड़कों के किनारे खाली खेतों में वीरान पड़े मंदिरों की तरह मैं अकेली हो जाती हूँ
इसलिए
जब भी वह शहर से दूर जाता है
मैं उसे स्टेशन के बाहर से छोड़ कर चली आती हूँ
और कई कई दिन तक मुझे लगता है
बस वह सब्जी लेने गया है
या हजामत बनवाने
बस आता ही होगा
भ्रम पालने में वैसे भी हम मनुष्यों का कोई सानी नही
26 comments:
दिल के बहलाने को गालिब ये ख़याल अच्छा है..............
बहुत प्यारे भाव उकेरे हैं आपने...
अनु
भ्रम हो न हो - पालना पड़ता है , क्योंकि इसमें काल्पनिक खुशियाँ होती हैं ...
कल 09/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
जिंदगी कुछ हैं ही ऐसी सी
जब सीधा चलो तो ...उलटी दिशा में भागती हैं
और जब उल्टा भागने लगो तो सीधा चलने के सबक सीखती हैं ......
मन की व्यथा...हमेशा भागती सी क्यूँ हैं ?
Ballot sunder!
ख़यालों की खूबसूरत प्रस्तुति
sundar lekhan.........
sundar lekhan.........
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रेल होना अच्छा है
जेल होने से।
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बहुत अच्छी कविता
वाह . बहुत उम्दा
Vah! Behtreen, hardik badhai.
Meethesh Nirmohi,Rajasthan.
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