Friday, 24 June 2011

मै सहमत न थी.

जनवाणी समाचार  पत्र  04.09.2011   में यह कविता छपी है

नदी की लहरों
मैं नहीं बन पाई मात्र एक  लहर
नहीं तिरोहित किया मैंने अपना अस्तित्व नदी में
तुम्हारे जैसा पाणिग्रहण नहीं निभा  पाई मैं
इसलिए क्षमा मांगनी है तुमसे.

वृक्षों तुमसे नहीं सीख पाई दाता का जीवन
तुम्हारे फल, छाया और पराग देने के पाठ नहीं उतार पाई जीवन में
मेरी आशाओं के भीगे पटल पर धूमिल पड़ते तुम्हारे सबकों से क्षमा मांगनी है मुझे.

सूरज को पस्त करके लौटी गुलाबी शामो
तुम्हे  गुमराह करके 
अपने डर के  काले लबादों में ढक कर तुम्हे काली रातों  में बदलने के जुर्म में
क्षमा मांगनी है तुमसे

क्षमा मांगनी है कविता के उन खामोश  अंतरालों से
जो शब्दों के आधिपत्य में खो गए 
उन चुप्पियों  से
जो इतिहास के नेपथ्य में खड़ी रही बिना दखलंदाजी के
उन यायावरी असफलताओं से जिन्होंने समझौते की ज़मीनों पर नहीं बनाये घर

उन बेबाक लड़कियों से क्षमा मांगनी है मुझे जो मुस्कुराते हुए चलती है सड़क पर
जो बेख़ौफ़ उस लड़के की पीठ को राईटिंग पैड बना  कागज़ रख कर लिख रही है शायद कोई  एप्लीकेशन 
जो बस में खो गई है अपने प्रेमी की आँखों में
जिसने उंगलिया फंसा ली है लड़के की उँगलियों में
उन लड़कियों के साहस से क्षमा मांगनी है मुझे

जिनकी निष्ठा बौनी पड़ती रही  नैतिकता के सामने     
जो आधी औरतें आधी किला बन कर जीती रही तमाम उम्र
जिन्हें अर्धांगिनी स्वीकार नहीं कर पाए हम
जिनके पुरुष  नहीं बजा पाए उनके नाम की डुगडुगी
उन  दूसरी  औरतो से क्षमा मांगनी है मुझे.  

मुझे  क्षमा  मांगनी  है  
आकाश  में  उडती  कतारों के अलग  पड़े  पंछी से 
आकाश का एक कोना उससे छीनने के लिए
उस पर अपना नाम लिखने के लिए
उसके  दुःख में अपनी सूखी आँखों के निष्ठुर  चरित्र  के लिए

रौंदे गए अपने ही  टुकड़ों से
अनुपयोगी हो चुके रद्दी में बिके सामान से,
छूटे और छोड़े हुए रिश्तों से अपने स्वार्थ के लिए क्षमा  मांगनी है मुझे

नहीं बन पाई सिर्फ एक भार्या, जाया और सिर्फ एक प्रेयसी
नहीं कर पाई जीवन में बस एक बार प्यार
इसलिए क्षमा मांगनी है मुझे तुमसे
तुम्हारी मर्यादाओं का तिरस्कार करने के लिए .
घर की देहरी छोड़ते वक्त तुम्हारी  आँखों की घृणा  को अनदेखा  करने के लिए
तुम्हारे मौन को मौन समझने की भूल करने के लिए
मुझे क्षमा मांगनी है तुमसे!


8 comments:

Shyam Bihari Shyamal said...

'मैं सहमत न थी' भावपूर्ण है, प्रभावपूर्ण है...
छोटे कलेवर में ही लेकिन प्रदीर्घ रचना... बधाई...

आवेश said...

अदभुत|शब्दहीन कर देती है लीना की कविता ,जिन्हें पढ़कर सिर्फ और सिर्फ एक बड़ी चुप्पी ओढ़ लेने को जी चाहता है |हाँ ,एक बात जरुर है कि हम अब तक उनकी कविताओं में उल्लास ,उत्साह और उमंग ढूंढ़ पाने में असफल रहे हैं ,शायद इनके बिना कविता को ज्यादा आक्सीजन दे पाना संभव हो पाता हो |इस कविता को पढ़ते हुए मुझे रित्सुको कवाबाता के डन्डेलिओन याद आते हैं ,मगर ये सच है कि मौन को मौन समझने की भूल के लिए माफ़ी मांगते हुए लीना इस एक कविता को महान बना देती हैं |

madhu grover said...

sach me bahut gahrai chipi hoti hai

tumari kavitao me.

लीना मल्होत्रा said...

sh ashish tripathi wrote for me :

kavita men ek stree swar
by Ashish Tripathi on Tuesday, June 14, 2011 at 8:54pm
LEENA MALHOTRA ek samvedansheel aur vicharsheel kavyitri hain.unki kavitaon men samkalin bharteey stree ki aavaz mukhar hoti hai.ve saf aur sahaj tareeqe se apni bat kahtee hain,kavita men anavashyak kala-vyayam se bachatee hain,jisse unka prabhav gahra hota hai.unki kavitaon men ek dansh ka gahra ehsas hai..purush-niyantrit samaj ke dansh..jo stree ki aatma par lagte hain..iseeliye kai kavitaon men samvedana unhen kathor sawal poochne ke liye vivash kartee hai.

leena ji ne sadharan stree aur madhya-vitt stree donon ko apni kavitaon men samet liya hai.unki kavitaon men samvedana prayah mukhar hai,par vah bhavukta ki or jane ki bajay hamesha vichar aur samaj-bodh ka sira pakde rahtee hai.jisse use padhte hue paramparik bodh vale vyakti ko paryapt asuvidha ho sakti hai..yah uska ek aur taqatvar pahloo hai.

UPSC KE BUS STOP PAR BAITHI EK LADKI,AFRA TUMHEN SHARM NAHIN AATI,TUMHARE PREM MEN GADIT THA,USE BHI TERI TARAH UNCHAIYAN PASAND THIN,PYAR MEN DHOKA KHAYEE LADKI,EK MAN KI PRARTHANA jaisee kavitayen kavi ki vaicharikta,nirbhayata,sahsikta ke udaharan hain.vo jo seeta ne nahin kaha ek sadharan aur parachalit lagtee aapatti ko naye kon se uthatee hai...

MAIN SAHMAT NAHIN THI is kadi men ek aur rang bikhertee hai.chama mangne ke paramprik bhashik- chand men yah darasal sawalon ka pulinda hai,aur aapattiyon ka bhi..



ye kavitayen kavi ko gambheerta se padhe jane ki mang kartee hain...kya hindi-samaj iske liye prastut hai..??

लीना मल्होत्रा said...

oopar likhe lekh par di gai tippaniyan :-


Ashutosh Singh, डॉ. कविता वाचक्नवी, Ramji Yadav and 48 others like this.

Ashok Kumar Pandey निश्चित रूप से लीना जी की यह कविता एक गंभीर और स्वागत योग्य रचना है...उनका स्वागत
June 14 at 8:55pm · Unlike · 6 people

Aparna Manoj Leena ji ko kavitakosh mein padha. aafra vishesh pasan aai. phoolon par link share kiya hai. Leena ji ko punah badhai!
June 14 at 8:56pm · Unlike · 5 people

Asima Bhatt badhaee.
June 14 at 9:05pm · Unlike · 3 people

Rajeev Rahi तीक्ष्ण टीस से भरी टीसने वाली कविता...कविता के साथ -साथ आपकी टिप्पणी भी उनकी कविताओं को पढ़ने की जिज्ञासा पैदा करने वाली है...
June 14 at 9:05pm · Unlike · 5 people

Aparna Manoj http://shrijita.blogspot.c​om/2011/06/blog-post_14.ht​ml Leena ki kavita yahan padhen..
June 14 at 9:07pm · Unlike · 7 people

Shahid Akhtar नहीं बन पाई सिर्फ एक भार्या, जाया और सिर्फ एक प्रेयसी

नहीं कर पाई जीवन में बस एक बार प्यार

इसलिए क्षमा मांगनी है मुझे तुमसे
...See More
June 14 at 9:08pm · Unlike · 5 people

Abha Bodhisatva लीना को पढ़ी, सचमुच सजग और संवेजनशील कवियत्री...बड़ी बाते पर सहज ढंग, सुंदर .
June 14 at 10:07pm · Unlike · 6 people
Leena Malhotra Rao sudhjano shat dhanyavad. aapne itna saraha ... shukriya.
June 14 at 10:17pm · Like · 6 people

Nand Bhardwaj इसमें कोई शक नहीं कि लीना मल्‍होत्रा अपनी अभिव्‍यक्ति के प्रति गहरी सोच रखने वाली कवयित्री हैं, मैंने इनके ब्‍लॉग पर प्रस्‍तुत अधिकांश कविताएं पढ़ी हैं और समय समय पर अपनी राय भी जाहिर करता रहा हूं। आशीष ने सही कहा है कि इन कविताओ में स्‍त्री...See More
June 14 at 10:24pm · Unlike · 6 people

Rakesh Tiwari Meri aisi manyata hai jo man ko bhaye wo rachna utkrishta hai aur ye rachna mere man ko bha gayee hai. Bas meri samajh itna hi kahti hai. Ho sakta hai kuchh log is se sahmat na ho.
June 14 at 11:53pm · Unlike · 4 people

Musafir Baitha परम्परागत दायरों को लांघती स्त्री के कदमों, संघर्षों, उड़ानों,अभियानों ,आकाँक्षाओं स्वरों, स्वप्नों को मजबूत शब्द देती कविता. एक अनाम सी कवि (गीताश्री के प्रभाव में यह शब्द!) एक उत्कृष्ट और मैच्योर रचना. बधाई कवयित्री और प्रस्तुतकर्ता आशीष त्रिपाठी को.
ऐसी प्रतिभाओं का उत्खनन और सम्यक प्रकाशन जरूरी है.कविता के साथ नत्थी टिप्पणी भी देवनागरी में आई होती तो श्रेयस्कर होता.
लिंक अपनी फेसबुक वाल पर सहभाग करता हूँ.
June 15 at 7:53am · Unlike · 5 people

Om Nishchal मुझे पहली कविता पसंद आई है अपने नाराज़ तेवर के साथ। लीना जी और उनके प्रस्‍तावक आशीष दोनों को बधाई।

लीना मल्होत्रा said...

ooparokt lekh par prapt kuchh aur tippaniyan :-

Gita Pandit मुझे पसंद हैं लीना मल्होत्रा की रचनाएँ..... आभार आशीष ...
June 15 at 9:01am · Unlike · 2 people
Leena Malhotra Rao bahut dhayavad. Ashish Tripathi aur sabhi mitro. meri kuchh rachnaye aap http://lee-mainekaha.blogs​pot.com/ par bhi padh sakte hain.
June 15 at 10:35am · Like · 4 people

Siya Sachdev nice ...very beautifull lines nice thoughts...
June 15 at 12:21pm · Unlike · 4 people

Ramagya Shashidhar कविता ठीकठाक है.इसमें अनुभव से ज्यादा क्राफ्ट है.आज कविता के सामने सबसे बड़ा संकट उसका अनुभवहीन कवि और समझौतापरस्त आलोचक है.कविता भाषा और ज्ञान से नहीं बोध के भीतर पिघलती सुलगती जीवन प्रक्रियाओं से बनती है.
June 15 at 4:15pm · Unlike · 4 people

Ishwar Dost अच्छी कविता प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद.
June 15 at 5:13pm · Unlike · 3 people
Leena Malhotra Rao Ramagya Shashidhar ji mai abhari hoon ki aapne apni asweekriti ko shabd diye. aapka swagat hai aisi alochnaaye hame behatar karne ki chunauti deti hai. shukriya
June 15 at 8:01pm · Like · 5 people

Ashish Tripathi anubhav aur craft ke sambandh ko gahrayee se samjhne aur sarleekaran se bachgne ki zaroorat hai....sanrachana ki bhi apni rajniti hoti hai..mujhe to is kavita men kshama ke shilp se ek naye tarah ke tanav ki srishti hoti dikh rahi hai...
June 15 at 8:07pm · Unlike · 3 people

Ashish Tripathi udahran ke liye dekhiye - नहीं बन पाई सिर्फ एक भार्या, जाया और सिर्फ एक प्रेयसी
नहीं कर पाई जीवन में बस एक बार प्यार
इसलिए क्षमा मांगनी है मुझे तुमसे
तुम्हारी मर्यादाओं का तिरस्कार करने के लिए .
घर की देहरी छोड़ते वक्त तुम्हारी आँखों की घृणा को अनदेखा करने के लिए
तुम्हारे मौन को मौन समझने की भूल करने के लिए
मुझे क्षमा मांगनी है तुमसे!
June 15 at 8:09pm · Unlike · 5 people

Arun Dev अनुभूति और कला के संतुलन से ही कविता लिखी जाती है. यह संतुलन अभ्यास और अध्यवसाय से ही संभव है.. , अनुभूति के लिए आत्मसंघर्ष लाजमी हैं. लीना की कविताएँ उम्मीद जगाती हैं.
June 15 at 8:24pm · Unlike · 4 people

Ramagya Shashidhar फार्मूलाबद्धता,विमर्शमूलक ज्ञान ,विशाल जनता के अनुभव और भाषा से बढती दूरी ने हिंदी कविता की पठनीयता और संरचना को तबाह कर दिया है.कृपाकर शब्द जल की जगह गंभीर बहस की जरूरत है,पर यह जगह उचित नहीं.कही और मोर्चा खोलना चाहें तो आशीष जी का स्वागत है.
June 15 at 10:08pm · Like · 1 person

Ashish Tripathi morcha to aapne khol hi diya hai ramagyan ji ! morche kholkar sangharsh ki ichcha poochane ke kya aashay ho sakte hain manyvar.aaiye aapka swagat hai..
June 15 at 10:26pm · Like · 1 person

Ashish Tripathi vaise mujhe khushi hai ki hamari nirantar hone vali bahson ke liye ek naya bindu ubhara hai..aur ham maitree jalpangrih ya vibhag men ise zyada tallinta se aage badha sakte hain..
June 15 at 10:39pm · Like

Ashish Tripathi yah jagah uchit nahin to hamare pas jagahon ke vikalp khan kam hain...jahan mauka milega bahas hogi..yah to jivant aalochan ki shakti hai..
June 15 at 10:40pm · Unlike · 1 person

Jrd Masao आशिष त्रिपाठी जी द्वारा लीना जी की कविताओं की समीक्षा काफी सटीक है.. मैं musafir baitha की इस बात से सहमत हूं कि "कविता के साथ नत्थी टिप्पणी भी देवनागरी में आई होती तो श्रेयस्कर होता."...

मैंने लीना जी कविताओं में जो imagery देखी है वह uni...See More
June 15 at 11:45pm · Unlike · 3 people

Mohan Shrotriya Ek thopee hui maryaadaa ko itani bulandi aur saath hi vinamrataa ke saath chunauti ka jo swar rachaa-basaa hai poori kavitaa mein-- khaas taur par aakhiri panktiyon mein-- vah Leena ko apani samkaaleen anya kavyitriyon se alag khadaa kar detaa hai. yah alag honaa akele pad jaane ke arth mein nahin, balki vishishttaa ka dyotak hai. Badhaai Leena aur Ashish, donon ko.
June 16 at 4:08pm · Unlike · 4 people

Awesh Tiwari सुन्दर कविताओं पर सोंधी समीक्षा .
June 16 at 5:54pm · Unlike · 3 people
Leena Malhotra Rao Mohan Shrotriya ji abaar. saadar
June 16 at 5:57pm · Like · 2 people

लीना मल्होत्रा said...

uprokt lekh par prapt kuchh aur tippaniyaan.

Leena Malhotra Rao Mohan Shrotriya ji abaar. saadar
June 16 at 5:57pm · Like · 2 people

Tanaya Nag ‎"ladki hona hota hai mushkil, ladki hone mein dard bahut hai..." leena ji ko badhaai...
June 16 at 6:39pm · Unlike · 5 people

Vipul Sharma ek ummeed jagaati kavitaayen. saaf suthri, alag pehchaan. rachnaon me vividhtata ke saath stariyata bhi hai. kavitaayen na kewal khud se vartalaap karati hain, balki ek kachot bhi paida karti hain. kavita me stree ke dard, uski mansha, or rishton se upji peeda jhalakti hai.. leenaji ki kavitayen or ashish tripathi ji ki samikhsa badhai ki haqdaar hain.
June 16 at 7:45pm · Unlike · 3 people

Ashwini Kumar Sharma ek ladki ka jeevan kis prakar uljhano se ghira rehta or un uljhano me dab kar wo kis trah apne jeevan bahot si priya cheezo ka tyag karti hai................ in lino me yehi bataya gya hai......or leena se badhiya liney shayad hi koi likh paaye.... tumne bahot bahot hi saral shabdoon me hame is gambhir chetna ko samjhaya hai..... tum aise hi likhti rho....badhai tumko!!!!!!!!
June 16 at 9:40pm · Unlike · 2 people

Vimalendu Dwivedi मैं सिर्फ यह सोच रहा हूँ कि यह क्षमा भी क्यों मागी जा रही है..!
June 17 at 1:00am · Unlike · 1 person

Vimalendu Dwivedi मुझे लगता है कि कविता में यह स्त्री स्वर नहीं, पुरुष स्वर ही है...वरना इसे क्षमा के शिल्प में नहीं होना था.
June 17 at 1:09am · Unlike · 2 people

Tanaya Nag kshama shabd me anunay nahi balki vyangya hai....
June 17 at 1:43pm · Unlike · 4 people

Som Prabh मेरी मान्यता है कि किसी रचना को सबसे पहले विनम्रता से पढा जाना चाहिए. और हर रचना महान हो यह जरूरी नहीं है.और क्राफ्ट अनुभवहीनता का परिणाम नहीं है,कम से कम इस कविता में.किसी एक कविता को लेकर बहस और उसे हिंदी कविता की इतनी बडी पडताल से जोड देना न्याय संगत नहीं है.
June 18 at 12:46am · Unlike · 4 people

Ar Vind sundar madam!!
June 25 at 6:32pm · Like · 1 person

Jeevan Singh net deree se judne ke karan kavita ko ab jaakar parha hai.tippni bhi.aaj ke kai stree swaron se yaha is mamle mein bhinna swar lagaa ki yaha streevad se mukt stree pakshdharata kaa ek samkaaleen vishisht swar hai.saath hee kavya bhasha ke prati chaltaau raveyya nahin hai.prakriti ke aadhar ne kavita ko bodhgamya aur saundaryapurna banaa diya hai.
July 3 at 9:58am · Like · 1 person

leenamalhotra rao said...

aap sabhi mitro ka abhar.